बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

ताओ ते चिंग 68.1

जो (ताओ के) युद्धों में कुशल हो, सैन्य दिखावा न करे; जो सर्वाधिक सद्भावना से लड़े, क्रोध की ओर न मुड़े। जो विजयी हो फिर भी शत्रुओं से दूर रहे; जिसके आदेशों का लोग सबसे अधिक पालन करें, तब भी विनम्रतापूर्वक अपना कार्य करे। इस प्रकार हम कहते हैं, 'वह कभी संघर्ष नहीं करता, और इसी में उसकी शक्ति है।' इस प्रकार हम कहते हैं, 'वह लोगों की इच्छाओं को झुकाता है, जिससे वे उसके साथ एक हों।' इस प्रकार हम कहते हैं, 'स्वर्ग के समान उसके उद्देश्य हैं, प्राचीन काल का कोई ऋषि अधिक प्रकाशमान न था।'

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी