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ताओ ते चिंग 33.1

जो दूसरों को जानता है वह विवेकवान है; जो स्वयं को जानता है वह बुद्धिमान है। जो दूसरों पर विजय पाता है वह शक्तिशाली है; जो स्वयं पर विजय पाता है वह महान है। जो अपने भाग्य से संतुष्ट है वह धनवान है; जो ऊर्जा से कार्य करता रहता है उसका (दृढ़) संकल्प है।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

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यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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