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योग सूत्र 2.30

आचार-नियम ये हैं: किसी को चोट न पहुंचाना, सत्य बोलना, चोरी न करना, शुद्धता, लालच न करना।

अंग्रेजी अनुवाद: चार्ल्स जॉनस्टन (1912) · नीचे शब्द अर्थ उसी स्रोत से। स्रोत

ये पाँच नियम बौद्ध आचार-नियमों से लगभग एकदम समान हैं: किसी को न मारना, चोरी न करना, अनैतिकता में दोषी न होना, नशीली चीजें न पीना, सत्य बोलना। संत पॉल की सूची भी लगभग समान है: व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, लालच न करना। और इसी भावना में उस युवा को दिया गया उत्तर था जिसके पास बहुत संपत्ति थी और जिसने पूछा था, मुझे मोक्ष पाने के लिए क्या करना चाहिए? और उसे उत्तर मिला: आचार-नियमों का पालन करो।

यह व्यापक, सामान्य प्रशिक्षण, जो मानवीय चरित्र का निर्माण और विकास करता है, आध्यात्मिक जीवन के आगे के चरणों में सफलता की कोई भी आशा रखने से पहले काफी हद तक पूरा किया जाना चाहिए। पहले मनोवैज्ञानिक, फिर आध्यात्मिक। पहले मनुष्य, फिर देवदूत। पतंजलि की प्रणाली इसी व्यापक, मानवीय और बुद्धिमान आधार पर विश्राम करती है।

इस सूत्र पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह सूत्र आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से चित्त करते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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