बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

ताओ ते चिंग 7.2

इसलिए ऋषि अपने व्यक्तित्व को अंतिम स्थान देता है, फिर भी वह सबसे आगे का स्थान प्राप्त करता है; वह अपने व्यक्तित्व के साथ ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह उसके लिए विदेशी हो, और फिर भी वह व्यक्तित्व संरक्षित रहता है। क्या यह इसलिए नहीं है कि उसके पास कोई व्यक्तिगत और निजी उद्देश्य नहीं हैं, कि इसलिए ऐसे उद्देश्य वास्तविक हो जाते हैं?

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से लेता है और आपके अपने मार्ग को सम्मानित करता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ नहीं और कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी