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ताओ ते चिंग 6.1

घाटी की आत्मा नहीं मरती, वही रहती है; नारी रहस्य को हम यों पुकारते हैं। वह द्वार जहाँ से पहले वे निकले आए, वह मूल कहलाता है जहाँ से स्वर्ग और पृथ्वी बढ़े। लंबे समय तक अटूट रहती है इसकी शक्ति, कोमलता से उपयोग होती है, बिना किसी पीड़ा के छुए।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

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