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ताओ ते चिंग 46.2

महत्वाकांक्षा को मंजूरी देने से अधिक कोई अपराध नहीं है; अपने भाग्य से असंतुष्ट रहने से अधिक कोई विपत्ति नहीं है; प्राप्त करने की इच्छा से अधिक कोई त्रुटि नहीं है। इसलिए संतोष की पर्याप्तता एक स्थायी और अपरिवर्तनीय पर्याप्तता है।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

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