ताओ ते चिंग 33.2
जो अपने पद की आवश्यकताओं में विफल नहीं होता, वह दीर्घायु होता है; जो मर जाता है किंतु नष्ट नहीं होता, उसका जीवन दीर्घ होता है।
अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेगे (1891)। स्रोत
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यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ को सम्मान देते हैं।