बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

ध्यान 8.9

पश्चाताप एक आंतरिक और आत्म-निंदा है जो लाभकर किसी वस्तु की उपेक्षा या चूक के लिए है। अब जो कुछ भी अच्छा है, वह लाभकर भी है, और यह एक सच्चे गुणवान मनुष्य का कर्तव्य है कि वह इसे महत्व दे और तदनुसार उसका मूल्यांकन करे। लेकिन किसी सच्चे गुणवान मनुष्य ने कभी किसी शारीरिक सुख की उपेक्षा या चूक के लिए पश्चाताप नहीं किया: इसलिए कोई भी शारीरिक सुख न तो अच्छा है और न ही लाभकर है।

अंग्रेजी अनुवाद: मेरिक कैसाउबॉन (1634)। स्रोत

Ananda के साथ इस अनुच्छेद पर विचार करें

यह अनुच्छेद आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक अनुच्छेद, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी