बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

ध्यान 6.20

यदि कोई मुझे सुधार करे, और मुझे यह स्पष्ट करे कि मेरे किसी भी विचार या कार्य में मैं भूल करता हूं, तो मैं अत्यंत प्रसन्नता से अपनी गलती स्वीकार करूँगा। क्योंकि यह सत्य है जिसकी मैं खोज करता हूँ, जिससे मैं निश्चित हूँ कि कोई भी मनुष्य कभी हानि पहुंचा है; और मैं उतना ही निश्चित हूँ कि वह हानि ग्रहण करता है जो किसी भी त्रुटि या अज्ञान में बना रहता है।

अंग्रेजी अनुवाद: मेरिक कैसोबोन (1634)। स्रोत

Ananda के साथ इस अंश पर विचार करें

यह अंश आपके अंदर क्या जागृत करता है? कोई भी प्रश्न पूछें — Ananda कई परंपराओं से ग्रहण करता है और आपके पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक अंश, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ नहीं और, कभी नहीं।

🌐 English ·  हिन्दी