मेरी आत्मा का मैं अब इसी समय कैसा उपयोग कर रहा हूँ? इसी तरह बार-बार और हर मौके पर तुम्हें स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए; वह भाग जिसे वे बुद्धि-शक्ति कहते हैं, वह अब किसमें लगा हुआ है? मेरे पास किसकी आत्मा है? क्या किसी बालक की? या किसी युवा की? किसी स्त्री की? या किसी अत्याचारी की? किसी पशु या किसी वन-पशु की आत्मा?