बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 9.6

कोई भी मनुष्य बुराई को हल्के में न समझे, और अपने मन में न कहे कि वह मेरे पास नहीं आएगी। जल की बूंदों के गिरने से ही जल का घड़ा भर जाता है; मूर्ख बुराई से भर जाता है, भले ही वह उसे थोड़ा-थोड़ा करके एकत्रित करे।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर Ananda के साथ ध्यान करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी