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धम्मपद 9.2

यदि कोई व्यक्ति पाप करे, तो उसे दोबारा न करे; पाप में आनंद न लें: बुराई का परिणाम पीड़ा है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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