बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 8.5

अपने आप को जीतना सभी अन्य लोगों को जीतने से बेहतर है; न ही कोई देवता, न ही गंधर्व, न ही मार ब्रह्मा के साथ उस व्यक्ति की जीत को हार में बदल सकते हैं जिसने स्वयं को जीत लिया है और हमेशा संयम में रहता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके स्वयं के मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

हर रविवार एक मार्ग, एक प्रश्न। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी