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धम्मपद 8.10

लेकिन जो व्यक्ति सौ साल तक दुराचारी और संयमहीन जीवन जीता है, वह एक दिन का जीवन भी बेहतर है यदि कोई व्यक्ति पुण्यशील और विचारशील हो।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से सीखता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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