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धम्मपद 6.13

जिनका मन ज्ञान के सात तत्वों में दृढ़ता से स्थित है, जो किसी भी चीज़ से चिपके बिना, आसक्ति से मुक्ति में आनंदित होते हैं, जिनकी इच्छाओं को जीता गया है, और जो प्रकाश से भरपूर हैं, वे इसी लोक में मुक्त हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर ध्यान करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कोई भी प्रश्न पूछें — आनंद कई परंपराओं से ग्रहण करता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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