बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 5.9

नहीं, वह कर्म अच्छी तरह से किया गया है जिसके लिए मनुष्य को पश्चाताप नहीं होता है, और जिसका फल वह खुशी और प्रसन्नता से प्राप्त करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जगाती है? कोई भी प्रश्न पूछें — Ananda कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

प्रत्येक रविवार एक मार्ग, एक प्रश्न। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी