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धम्मपद 5.2

यदि कोई यात्री अपने से श्रेष्ठ या समान किसी से नहीं मिलता है, तो वह अपनी एकान्त यात्रा को दृढ़तापूर्वक जारी रखे; मूर्ख के साथ कोई साथिता नहीं है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ ध्यान करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लाभ उठाते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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