बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 5.16

"एक मार्ग है जो धन की ओर ले जाता है, दूसरा मार्ग है जो निर्वाण की ओर ले जाता है।" यदि भिक्षु, बुद्ध का शिष्य, यह सीख गया है, तो वह सम्मान की कामना नहीं करेगा, वह विश्व से अलगाव के लिए प्रयास करेगा।

अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक पाठ, एक प्रश्न, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी