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धम्मपद 3.9

शीघ्र ही, हाय! यह शरीर पृथ्वी पर पड़ा होगा, तिरस्कृत, समझहीन, एक बेकार लकड़ी की तरह।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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