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धम्मपद 3.7

यदि किसी व्यक्ति के विचार बिखरे नहीं हैं, यदि उसका मन व्यथित नहीं है, यदि वह अच्छे या बुरे के बारे में सोचना बंद कर देता है, तो जब वह सचेत रहता है तो उसके लिए कोई भय नहीं है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से सीखता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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