बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 3.5

जो अपने मन को नियंत्रित करते हैं, जो दूर भटकता है, अकेले घूमता है, शरीर रहित है, और हृदय के कक्ष में छिपा है, वे मार (प्रलोभन देने वाले) के बंधन से मुक्त हो जाएंगे।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लाभ लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक अंश, एक सवाल, हर रविवार को। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी