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धम्मपद 3.2

जैसे एक मछली अपने जलीय घर से निकाली गई और सूखी जमीन पर फेंकी गई, हमारा विचार मार (परीक्षक) के प्रभुत्व से बचने के लिए सर्वत्र कांपता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

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यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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