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धम्मपद 26.9

जो व्यक्ति शरीर, वाणी या विचार से अपराध नहीं करता और इन तीनों बातों में नियंत्रित रहता है, उसे मैं सचमुच ब्राह्मण कहता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

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यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — अनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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