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धम्मपद 26.35

मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ जिसने मनुष्यों के सभी बंधनों को छोड़ दिया है, देवताओं के सभी बंधनों से परे उठ गया है, और सभी और प्रत्येक बंधन से मुक्त है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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