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धम्मपद 26.21

मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ जिसका ज्ञान गहरा है, जो बुद्धि से संपन्न है, जो सही और गलत मार्ग को जानता है, और सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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