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धम्मपद 26.13

जो मनुष्य गंदे वस्त्र पहनता है, जो दुबला-पतला है और शिराओं से ढका हुआ है, जो वन में अकेले रहता है और ध्यान करता है, उसे मैं सच में एक ब्राह्मण कहता हूँ।

अनुवाद: एफ़. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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