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धम्मपद 25.8

जो व्यक्ति अपने नाम और रूप से तादात्म्य नहीं रखता और जो अब नहीं रहे उसके लिए शोक नहीं करता, वही सच में भिक्षु कहलाता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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