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धम्मपद 25.5

जो कानून में रहता है, कानून में आनंद लेता है, कानून पर ध्यान करता है, कानून का पालन करता है, वह भिक्षु कभी सच्चे कानून से नहीं हटेगा।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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