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धम्मपद 25.3

जो अपने हाथों को नियंत्रित करता है, जो अपने पैरों को नियंत्रित करता है, जो अपने वचन को नियंत्रित करता है, जो अच्छी तरह से नियंत्रित है, जो भीतर से आनंदित है, जो एकत्रित है, जो एकांत और संतुष्ट है, उसे वे भिक्षु कहते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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