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धम्मपद 25.2

शरीर में संयम अच्छा है, वाणी में संयम अच्छा है, मन में संयम अच्छा है, सभी चीज़ों में संयम अच्छा है। सभी चीज़ों में संयमित भिक्षु, सभी दुःख से मुक्त होता है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मानित करते हैं।

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