बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 25.1

आंख में संयम अच्छा है, कान में संयम अच्छा है, नाक में संयम अच्छा है, जीभ में संयम अच्छा है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक पाठ, एक प्रश्न, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी