बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 24.8

प्राणी की सुखें विलासितापूर्ण और शानदार हैं; काम में डूबे हुए और सुख की खोज में लगे हुए, मनुष्य (बार-बार) जन्म और क्षय से गुजरते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी