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धम्मपद 24.6

जिसकी तृष्णा सुख की ओर छत्तीस नाड़ियों में अत्यधिक बहती है, उसे लहरें उस भ्रमित मनुष्य को बहा ले जाएंगी, अर्थात् उसकी इच्छाएं जो आसक्ति पर निर्धारित हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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