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धम्मपद 24.22

सुख मूर्खों का विनाश करते हैं, यदि वे दूसरे किनारे की तलाश नहीं करते; मूर्ख अपनी इच्छा के कारण सुख से स्वयं को नष्ट कर लेता है, मानो वह अपना ही शत्रु हो।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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