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धम्मपद 24.17

यदि कोई व्यक्ति संदेह को शांत करने में प्रसन्न हो, और सर्वदा विचार करते हुए, उस पर ध्यान लगाए जो अप्रिय है (शरीर की अशुद्धता, आदि), तो वह निश्चित ही मार की जंजीर को हटा देगा, वरन उसे काट देगा।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

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यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कोई भी प्रश्न पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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