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धम्मपद 24.12

बुद्धिमान लोग उस बंधन को शक्तिशाली नहीं मानते जो लोहे, लकड़ी या सन से बना है; कीमती पत्थरों और अंगूठियों, पुत्रों और पत्नी की चिंता कहीं अधिक शक्तिशाली है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

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यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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