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धम्मपद 23.4

इन पशुओं के साथ कोई भी मनुष्य अतुलनीय देश (निर्वाण) तक नहीं पहुंचता, जहां एक नियंत्रित मनुष्य एक नियंत्रित पशु पर जाता है, अर्थात् अपने ही अच्छी तरह नियंत्रित आत्म पर।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान खींचते हैं और आपके अपने पथ को सम्मान देते हैं।

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