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धम्मपद 21.8

गोतम के शिष्य सदा जाग्रत रहते हैं, और उनके विचार दिन-रात सदा धर्म पर केंद्रित रहते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ग्रहण करते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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