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धम्मपद 21.5

एक सच्चा ब्राह्मण निरापद रहता है, भले ही वह पिता और माता को मार डाले, और दो शक्तिशाली राजाओं को, भले ही वह सभी विषयों के साथ एक राज्य को नष्ट कर दे।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने पथ को सम्मानित करते हैं।

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