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धम्मपद 20.4

आप स्वयं को प्रयास करना चाहिए। तथागत (बुद्ध) केवल उपदेशक हैं। जो विचारशील पथ में प्रवेश करते हैं वे मार के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से निकालते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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