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धम्मपद 20.13

आत्म-प्रेम को अपने हाथ से काट डालो, जैसे शरद ऋतु का कमल। शांति के मार्ग को संजोए रखो। निर्वाण को सुगत (बुद्ध) ने दिखाया है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

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