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धम्मपद 20.11

पूरे वन (वासना के) को काट डालो, केवल एक पेड़ नहीं! वन (वासना के) से ख़तरा आता है। जब तुमने वन (वासना के) और उसकी झाड़ियों दोनों को काट दिया हो, तो, भिक्षुओ, तुम वन से मुक्त हो जाओगे और स्वतंत्र हो जाओगे!

अंग्रेज़ी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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