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धम्मपद 20.10

उत्साह के माध्यम से ज्ञान प्राप्त होता है, उत्साह की कमी से ज्ञान खो जाता है; जो मनुष्य लाभ और हानि के इस दोहरे मार्ग को जानता है, वह स्वयं को इस तरह रखे कि ज्ञान बढ़े।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

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