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धम्मपद 2.7

व्यर्थता का अनुसरण न करें, न ही प्रेम और वासना के आनंद का! जो व्यक्ति परिश्रमी और ध्यानशील है, वह प्रचुर आनंद प्राप्त करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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