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धम्मपद 2.10

आत्मनियंत्रण से ही मघवान (इंद्र) देवताओं के स्वामित्व तक पहुंचे। लोग आत्मनियंत्रण की प्रशंसा करते हैं; असावधानी सदा निंदित होती है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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