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धम्मपद 19.12

जो व्यक्ति केवल मौन रहता है वह मुनि नहीं है, यदि वह मूर्ख और अज्ञानी है; किंतु वह बुद्धिमान जो तराज़ू धारण करके अच्छाई को चुनता है और बुराई से बचता है, वह मुनि है, और इसी कारण मुनि है; जो इस संसार में दोनों पक्षों को तौलता है, वह मुनि कहलाता है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

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