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धम्मपद 18.17

आसक्ति जैसी कोई आग नहीं है, घृणा जैसी कोई शार्क नहीं है, मूर्खता जैसा कोई फंदा नहीं है, लालच जैसा कोई बाढ़ नहीं है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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