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धम्मपद 17.7

यह एक पुरानी कहावत है, हे अतुल, यह केवल आजकी नहीं है: 'जो चुप बैठा है उसकी निंदा करते हैं, जो बहुत बोलता है उसकी भी निंदा करते हैं, जो कम बोलता है उसकी भी निंदा करते हैं; पृथ्वी पर कोई भी ऐसा नहीं है जिसकी निंदा न की जाती हो।'

अंग्रेज़ी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से निकालते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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