One Source Sangha को बेहतर अनुभव के लिए इंस्टॉल करें

धम्मपद 17.2

जो उठते हुए क्रोध को एक लुढ़कते रथ की तरह रोक लेता है, उसे मैं वास्तविक सारथी कहता हूँ; अन्य लोग बस लगाम पकड़े होते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी