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धम्मपद 17.12

मन के क्रोध से सावधान रहो, और अपने मन को नियंत्रित करो! मन के पापों को छोड़ो, और अपने मन से पुण्य का अभ्यास करो!

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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